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In this section, you can read 3 stories per page, about deities, and planets, etc. to know more about Hinduism, Hindu traditions, and culture. This section is free of cost.
	 

क्या होता है कालसर्प, दोष अथवा योग? या फिर केवल एक भ्रम, निवारण सहित जानिए

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कुंडली में कैसे बनता है “कालसर्प योग”? जब जन्म कुंडली में सारे ग्रह राहु से केतु के मध्य आ जाते हैं तब इस स्थिति को कालसर्प दोष का नाम दिया जाता है। कब देता है बुरे फल? जन्म कुंडली में यदि राहु के साथ सूर्य, चन्द्र या गुरु स्थित है और वह कालसर्प योग बना रहा है तब यह शुभ फलों में कमी कर सकता है इसलिए नहीं कि ये योग बना है इसलिए कि सूर्य/चन्द्र, राहु के साथ ग्रहण योग बनाते हैं जो अशुभ योग है। सूर्य आत्मा तो चंद्र मन है जबकि राहु का कोई अस्तित्व ही नहीं है वह तो धुँआ भर है। जब चारों ओर धुँआ छाया होगा तब कैसे आत्मा का निखार होगा और कैसे हमारा मन निर्मल हो पाएगा। इस धुँए में व्यक्ति को कुछ भी स्पष्ट दिखाई नहीं देगा तो अनिर्णय की स्थिति में रहेगा और जब निर्णय ही नहीं ले पाएगा तो जीवन थमा सा लगेगा ही। दूसरा ये कि राहु धुँआ-सा है तो व्यक्ति को स्पष्ट परिस्थितियाँ दिखाई नहीं देती जिससे उसके द्वारा लिए निर्णय सही नहीं हो पाते और जीवन में बाधाएं तथा हानि होती है। यही राहु जब गुरु के साथ रहकर इस योग को बना है तब मन में सही-गलत को लेकर कशमकश सी चलती रहती है क्योंकि गुरु ज्ञान का कारक है वह व्यक्ति को गलत करने से रोकता है लेकिन राहु का प्रभाव इतना ज्यादा हो जाता है वह ज्ञानी को भी अज्ञानी बना देता है और जातक परंपरा से हटकर कार्य कर बैठता है। हमेसा बुरा नहीं होता कालसर्प योग यह कालसर्प योग व्यक्ति को शिखर तक भी ले जाता है। जब केन्द्र में राहु स्थित है तब यह अपनी अशुभता भूल जाता है और अच्छे फल प्रदान करता है। जब राहु केन्द्र में त्रिकोण भावों के स्वामी के साथ स्थित है तब यह राजयोगकारी हो जाता है और शुभ फल देता है। जब राहु त्रिकोण में स्थित होकर केन्द्र के स्वामी से संबंध बनाता है तब भी यह राजयोगकारी हो जाता है। राहु अगर मेष, वृष, मिथुन, कर्क, कन्या, मकर, कुंभ में है तब भी अच्छा कहा जाता है विशेषकर मेष, वृष व कर्क का राहु। यदि दशम भाव में राहु स्थित है तब व्यक्ति अपने कैरियर में शिखर तक पहुंचता है। तृतीय भाव में राहु स्थित होने से व्यक्ति कभी हार मानता ही नहीं है क्योंकि यहाँ राहु उसे सदा आगे बढ़ने को प्रेरित करता है। राहु के बारे में एक भ्राँति यह भी है कि पंचम भाव में स्थित राहु संतान हानि करता है लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि पंचम भाव का राहु एक पुत्र संतति भी प्रदान करता है। छठे भाव में स्थित राहु कभी शत्रुओं को जातक पर हावी नहीं होने देता है। इसलिए व्यक्ति को जीवन में बाधाएँ आती हैं, धन हानि होती है या अन्य कोई भी घटना घटती है तब उसका सारा दोष इस कालसर्प दोष पर नहीं थोपना चाहिए क्योंकि अगर ये बन रहा है तो आपका कर्म है और यदि इस योग में शामिल राहु या केतु की दशा आती है तब पूर्व जन्मों के संचित कर्मों के कारण आपको इसे भोगना भी पड़ेगा। कालसर्प योग/दोष से मुक्ति के उपाय यदि फिर भी किसी व्यक्ति को लगता है कि कालसर्प योग होता ही है और उसी के कारण उसे बाधा आ रही है तब आवश्यक नहीं कि उसके निवारण के लिए वह हजारों रुपया खर्च कर दे या ज्योतिषियों द्वारा बताए स्थानों पर जाकर इसकी पूजा कराकर आए। जैसा कि बताया गया है कि राहु साँप का मुख तो केतु पूँछ है और यह साँप भगवान शंकर के गले की शोभा बढ़ाता है, उनके गले का हार है इसलिए कालसर्प दोष का सर्वोत्तम उपाय शिव की पूजा-उपासना से बढ़कर कोई दूसरा नहीं हैं। शिवलिंग पर नियमित जलाभिषेक से जातक को राहु के प्रकोप से राहत मिलती है। व्यक्ति नियमित रूप से रुद्री पाठ कर सकता है, मासिक शिवरात्रि का उपवास रख सकता है। प्रतिदिन एक माला “ऊँ नम: शिवाय” की कर सकते है अथवा महामृत्युंजय मंत्र की एक माला नियमित रूप से करने पर भी व्यक्ति को राहत मिलती है। चंदन से बनी वस्तुओं का उपयोग करने से मन शांत होता है और भ्रम की स्थिति से व्यक्ति बचता है। शनिवार के दिन राहु के नाम का दान भी दिया जा सकता है विशेषकर जो कुष्ठ रोगी होते हैं उन्हें खाने-पीने की वस्तुएँ दान की जाएँ। रात्रि में राहु के मंत्र की एक माला करने से भी राहु शांत होता है।



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लाफिंग बुद्धा को घर पर रखने से होते हैं ये चमत्कारी लाभ

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पैसों से जुड़ी समस्या यदि पैसों से जुड़ी कुछ समस्या हो तो घर और कार्यस्थल पर धन की पोटली वाले बुद्धा को रखना चाहिए। तरक्की पाने के लिए बिजनेस या किसी कार्य में तरक्की पाने के लिए अपने कार्य स्थल पर दोनों हाथ ऊपर किए हुए लॉफिंग बुद्धा की मूर्ति रखनी चाहिए। दुर्भाग्य को दूर भगाने के लिए दुर्भाग्य से हो गए है परेशान तो लेटे हुए लॉफिंग बुद्धा घर ले आइए ये घर से दुर्भाग्य को दूर भगा देते हैं। संतान से जुड़ी समस्या संतान से जुड़ी कोई समस्या हो तो बच्चों के साथ बैठे लॉफिंग बुद्धा को घर पर रखना बहुत शुभ होता है। तनाव या मानसिक शांति के लिए तनाव या मानसिक शांति के लिए मुद्रा में बैठे लॉफिंग बुद्धा को घर पर रखना बहुत शुभ माना जाता है। हर तरह की बाधाएं दूर करने के लिए किसी भी तरह की समस्या को घर से दूर रखने के लिए नाव पर बैठे लॉफिंग बुद्धा को घर पर रखना चाहिए।



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अमावस्या पर भूलकर भी न करें ये काम

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ऐसा माना जाता है कि अमावस्या के दिन नकारात्मक ऊर्जा जैसे भूत-प्रेत, अशुभ साया सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं। इस वजह से बड़े बुजुर्गो का कहना है कि अमावस्या की रात को शमशानघाट या किसी सुनसान जगह पर नहीं घूमना चाहिए। ये काम वर्जित है * अमावस्या वाले दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान करने के बाद सूर्य देवता को जल जरूर चढ़ाएं। * अमावस्या पर ध्यान रखें कि घर में किसी भी तरह का कलेश न हो जिससे बात लड़ाई-झगड़े तक जा पहुंचे। कहा जाता है की अमावस्या पर परिवार के सदस्यों में कलेश हो तो घर पर पितरों की कृपा नहीं रहती इसलिए घर पर शांति बनाये रखें। * अमावस्या पर तामसिक चीजों जैसे मांस,लहसुन,प्याज,मदिरा आदि का सेवन नहीं करना चाहिए। अमावस्या पर पति-पत्नी को आपस में संबंध नहीं बनाना चाहिए। * गरुण पुराण के अनुसार अमावस्या पर जो पति-पत्नी आपस में संबंध बना लेते हैं उनकी होने वाली संतान कभी सुखी नहीं रह पाती। अमावश्या पर करें ये अमावस्या के दिन सुबह स्नान करके पीपल की पूजा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। लेकिन आपको बता दें कि शनिवार के अलावा अन्य दिन पीपल का स्पर्श नहीं करना चाहिए इसलिए पूजा करें लेकिन पीपल के वृक्ष का स्पर्श ना करें इससे धन की हानि होती है।



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