पुखराज रत्‍न – Pukhraj Ratan | (PLANET : Jupiter (बृहस्‍पति देव का रत्‍न है))

Astrologically Benefits🪶🪶

पुखराज रत्‍न के लाभ – Pukhraj ratna ke fayde in Hindi इस स्‍टोन से व्‍यापार, नौकरी, शिक्षा के क्षेत्र में सफलता मिलती है और ये आर्थिक एवं सामाजिक स्थिति में भी सुधार लाता है। सेहत, वैवाहिक जीवन, पैतृक संपत्ति जैसे क्षेत्रों में पुखराज लाभ प्रदान करता है। चूंकि बृहस्‍पति समृद्धि और ज्ञान का स्‍वामी है इसलिए इस रत्‍न को पहनने से उन क्षेत्रों में व्‍यापार एवं नौकरी करने में सफलता और भाग्‍य का साथ मिल सकता है जहां पर बुद्धि एवं रचनात्‍मकता की जरूरत होती है। कानून, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगों के अलावा ये स्‍टोन व्‍यापारियों को भी फायदा पहुंचाता है। आर्थिक रूप से स्थिरता लाने और इच्‍छाशक्‍ति बढ़ाने के लिए इस रत्‍न को बहुत लाभकारी माना जाता है। भौतिक सुख की प्राप्‍ति के लिए इसे पहना जा सकता है। ये पीले पुखराज के सकारात्‍मक लाभों में से एक है। पुखराज के स्वास्थ्य संबंधी लाभ – Pukhraj ke swasthya labh in Hindi पुखराज शरीर के सात चक्रों में से मणिपूर चक्र का स्‍वामी होता है। यह चक्र पाचन तंत्र और प्रतिरक्षा तंत्र को नियंत्रित करता है। इस चक्र को संतुलन प्रदान करने के लिए पुखराज पहना जाता है। गुरु का रत्‍न पुखराज नपुसंकता और यौन इच्‍छा में कमी आने जैसी समस्‍याओं को भी दूर करता है। अगर कोई पुरुष नपुंसकता से ग्रस्‍त है तो उसे पुखराज जरूर पहनना चाहिए। पुखराज त्‍वचा के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। त्‍वचा से संबंधित बीमारियों जैसे कि सोरायसिस और डर्मेटाइटिस के इलाज में पुखराज मदद करता है। पाचन तंत्र से जुड़ी परेशानियों जैसे कि अपच, पेट में अल्‍सर, मल पतला आने और पीलिया आदि को भी ठीक करने में पुखराज रत्‍न लाभकारी है। यह रत्‍न चिंता और तनाव को दूर कर मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। इसका धारणकर्ता के मस्तिष्‍क पर सकारात्‍मक प्रभाव पड़ता है। अस्‍थमा, ब्रोंकाइटिस, साइनस, फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों को भी इस रत्‍न से ठीक किया जा सकता है। हड्डियों से जुड़ी बीमारियों, जोड़ों में सूजन और गठिया के मरीज़ों को भी पुखराज पहनने से राहत मिलती है। पुखराज कितने रत्ती का पहनें – Pukhraj kitne ratti ka pehne in Hindi अगर आप पुखराज स्‍टोन धारण करना चाहते हैं तो कम से कम 3.25 कैरेट का पुखराज जरूर पहनें। अगर आप पुखराज रत्‍न से लाभ पाना चाहते हैं तो कम से कम इतने रत्ती का स्‍टोन तो जरूर धारण करें। चूंकि, ये बृहस्‍पति देव का रत्‍न है इसलिए इसे गुरुवार के दिन पहनना चाहिए। आपको पुखराज रत्‍न कितने रत्ती का पहनना चाहिए, ये जानने का सबसे आसान तरीका है कि आप अपने वजन को देखें। मान लीजिए आपका वजन 60 कि.ग्रा है, तो आपको 6 रत्ती का पुखराज पहनने से लाभ होगा।


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पुखराज किस धातु में पहनेंं – Pukhraj kis dhatu me pahne in Hindi पुखराज के लिए स्‍वर्ण की धातु यानी सोना सबसे ज्‍यादा फायदेमंद होता है। इसके बाद चांदी में भी जड़वाकर पुखराज पहन सकते हैं। पुखराज पहनने की विधि – Pukhraj pehne ki vidhi in Hindi चूंकि पुखराज बृहस्‍पति देव का रत्‍न है इसलिए इसे बृहस्‍पतिवार के दिन पहनना चाहिए। गुरुवार की सुबह उठकर स्‍नान करें और फिर घर के पूजन स्‍थल में साफ आसन पर बैठ जाएं। इस रत्‍न को 5,9 या 12 रत्‍ती में पहनना फायदेमंद रहता है। एक तांबे का पात्र लें और उसमें गंगाजल या कच्‍चा दूध डालकर पुखराज रत्‍न को उसमें डुबो दें। अब 108 बार ‘ऊं बृं बृहस्‍पताये नम:’ का जाप करें। धूप-दीप जलाएं और पुखराज को निकालकर धारण कर लें। पुखराज किसे पहनना चाहिए – Pukhraj kon dharan kare in Hindi गुरु के इस रत्‍न की धनु और मीन राशि हैं एवं 21 जून से 21 जुलाई के बीच पैदा हुए लोगों का यह भाग्‍य रत्‍न है। अगर आपका जन्‍म 21 फरवरी से 20 मार्च या 21 जून से 21 जुलाई के बीच हुआ है और आपका नाम दी, दू, थ, झ, दे, दो, चा, ची या ये, यो, भा, भी, भू, धा, फा, ड़ा, भे से है तो आप इस रत्‍न को पहन सकते हैं। इसके अलावा जो लोग अपनी कुंडली में बृहस्‍पति को बली करना चाहते हैं, वो भी इस रत्‍न को पहन सकते हैं। पुखराज पहनने का समय – Pukhraj pehne ka samay पुखराज रत्‍न को सोने की अंगूठी या लॉकेट में पहना जाता है। इस स्‍टोन को शुक्‍ल पक्ष के गुरुवार, गुरु पुष्‍य योग, पुनर्वसु, पूर्वाभाद्रपद या विशाखा नक्षत्र में पहना जाता है। पुखराज कितने समय में प्रभाव देता है – Pukhraj kitne time me prabhav deta hai गुरु के इस रत्‍न को धारण करने के बाद व्‍यक्‍ति को 30 दिनों के अंदर असर मिलने लगता है। धारण करने के बाद इस रत्‍न का प्रभाव 4 वर्ष तक रहता है और इसके बाद निष्क्रिय हो जाता है। पुखराज के निष्क्रिय होने के बाद नया यैलो सैफायर पहना जाता है। पुखराज स्‍टोन कहां पाया जाता है – Pukhraj kaha paya jata hai यैलो सैफायर म्‍यांमार, श्रीलंका, मेडागास्‍कर, थाईलैंड, चीन, ऑस्‍ट्रेलिया, नेपाल, नाइजीरिया, पाकिस्‍तान और कश्‍मीर एवं मोंटाना में पाया जाता है। लगभग 150 वर्षों पूर्व धरती की सतह के अंदर पत्‍थर पाए गए थे जिनके तेज दबाव और हीट से पुखराज की उत्‍पत्ति हुई थी। पुखराज कैसा होता है – Pukhraj kaisa hota hai सफेद, पीले, गुलाबी, आसमानी और नीले रंग का होता है। बृहस्‍पति ग्रह का प्रतिनिधित्‍व करने वाला पीले रंग का पुखराज होता है। गुरु ग्रह की शांति और शुभ फल की प्राप्‍ति के लिए पुखराज पहना जाता है। पुखराज रत्‍न का इतिहास – Pukhraj stone history in Hindi यैलो सैफायर स्‍टोन का इतिहास बहुत प्राचीन है। पुराने जमाने में अपने सतीत्‍व को बचाने के लिए सुंदर स्त्रियां इस रत्‍न को अपने पास रखा करती थीं। इसका एक कारण यह था कि पुखराज स्‍टोन पवित्रता का प्रतीक होता है और इसे अपने पास रखकर महिलाएं अपने सतीत्‍व की रक्षा करती थीं। पुखराज का उपरत्‍न – Pukhraj ka upratna यदि कोई व्‍यक्‍ति किसी कारणवश बृहस्‍पति के रत्‍न पुखराज को धारण नहीं कर सकता है तो वह पुखराज के उपरत्‍न सुनहला पहन सकता है। वैसे तो पुखराज के उपरत्‍न और भी कई हैं लेकिन सुनहला को सबसे अच्‍छा उपरत्‍न माना जाता है। सुनहला रत्न के लाभ : पुखराज के उपरत्‍न को सुनहला को पहनने से आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्‍ति मिलती है। यह उपरत्‍न मानसिक तनाव को भी दूर करने की शक्‍ति रखता है। उच्‍च शिक्षा की प्राप्‍ति एवं शिक्षा के क्षेत्र में सफल होने के लिए इस स्‍टोन को पहना जा सकता है। पुखराज रत्न कहां से खरीदें – Pukhraj kaha se kharide अगर आप प्रमाणित और उच्‍च क्‍वालिटी का पुखराज लेना चाहते हैं तो Jyotishgher से प्राप्‍त कर सकते हैं।


Price Expected🪶🪶

2000/carat


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