श्री अर्गला स्तोत्र | Argala Stotra
॥ अर्गला स्तोत्र ॥
Recited during Navratri for victory over obstacles and fulfillment of desires
॥ दोहा ॥
गणेशादि ग्रहोपेता पद्मावति नमोऽस्तुते।
प्रपन्नार्तिप्रहरण ध्येयं त्वामर्गलां स्तुमः॥
नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै सततं नमः।
नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियताः प्रणतास्त्वयि॥१॥
Salutations to the Goddess, to the great Goddess, to the consort of Shiva, always salutations. Salutations to the Primordial Nature, to the auspicious one, we bow to you constantly.
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।
गुणाश्रये गुणमयि नारायणि नमोऽस्तुते॥२॥
You are the eternal power of creation, preservation, and dissolution. You are the abode of all qualities, you are full of qualities. O Narayani, salutations to you.
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तुते॥३॥
You are the most auspicious of all auspicious things, O consort of Shiva, you accomplish all objectives. You are the refuge, the three-eyed one, O Gauri, O Narayani, salutations to you.
शक्तिशक्त्यै नमस्तुभ्यं नमस्ते भक्तवत्सले।
नमः सम्पत्करि देवि नमो नित्यप्रिये नमः॥४॥
नमो देव्यै महादेव्यै भक्तार्तिहरि वै नमः।
नमो रूपे महारौद्रे नमः सौम्ये नमो नमः॥५॥
नमः सर्वेश्वरि त्वं हि शरणागतवत्सले।
नमो हि करुणे त्वं हि दीनानाथौ नमो नमः॥६॥
॥ फलश्रुति ॥
इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं च यः पठेत्।
सर्वान्कामानवाप्नोति दुर्गालोकं च गच्छति॥
One who recites this hymn attains all desires and reaches the abode of Durga.
दुर्गा मंत्र संग्रह | Durga Mantras Collection
॥ दुर्गा मंत्राः ॥
Sacred mantras for different purposes and benefits
॥ मूल मंत्र ॥ (Mool Mantra)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
Om Aim Hreem Kleem Chamundayai Vicche
Bestows all Siddhis and protection
108 times daily during Navratri
॥ शक्ति मंत्र ॥ (Shakti Mantra)
ॐ दुर्गायै नमः॥
Om Durgayai Namah
Simple yet powerful, removes obstacles
॥ महिषासुरमर्दिनी मंत्र ॥ (Mahishasura Mardini)
ॐ आई ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
Om Aai Hreem Kleem Chamundayai Vicche
For victory over enemies and negative forces
॥ संकट नाशन मंत्र ॥ (Trouble Destroyer)
सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥
Sarva Mangala Mangalye Shive Sarvartha Sadhike
Sharanye Tryambake Gauri Narayani Namostute
॥ दुर्गा गायत्री ॥ (Durga Gayatri)
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
Om Katyayanaya Vidmahe Kanyakumari Dhimahi Tanno Durga Prachodayat
॥ सिद्ध कुंजिका स्तोत्र ॥ (Kunjika Stotra)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः।
ॐ ह्रीं ह्रूं ह्रः फट् स्वाहा॥
Key that unlocks all Durga Saptashati mantras
॥ रक्षा मंत्र ॥ (Protection Mantra)
ॐ ह्रीं दुं दुर्गायै नमः॥
Om Hreem Drum Durgayai Namah
॥ आरोग्य मंत्र ॥ (Health Mantra)
ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं पद्मनाभायै नमः॥
॥ विद्या मंत्र ॥ (Knowledge Mantra)
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ऐं नमः॥
॥ वशीकरण मंत्र ॥ (Attraction Mantra)
ॐ नमः कात्यायन्यै महामायायै विद्महे वृषारूढायै धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
॥ मंत्र जप विधि ॥
• Take bath and wear clean clothes
• Sit facing East or North
• Use Rudraksha or Tulsi mala
• Chant 108 times for best results
• Maintain purity and focus
श्री दुर्गा चालीसा | Durga Chalisa
॥ श्री दुर्गा चालीसा ॥
40 Verses in Praise of Goddess Durga
॥ दोहा ॥
नमो नमो दुर्गे सुख करनी ।
नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥
निराकार है ज्योति तुम्हारी ।
तिहूं लोक फैली उजियारी ॥
१.
नमो नमो दुर्गे सुख करनी । नमो नमो अम्बे दुःख हरनी ॥
२.
निराकार है ज्योति तुम्हारी । तिहूँ लोक फैली उजियारी ॥
३.
शशि ललाट मुख महाविशाला । नेत्र लाल भृकुटि विकराला ॥
४.
रूप मातु को अधिक सुहावे । दरश करत जन अति सुख पावे ॥
५.
तुम संसार शक्ति लय कीना । पालन हेतु अन्न धन दीना ॥
६.
अन्नपूर्णा हुई जग पाला । तुम ही आदि सुन्दरी बाला ॥
७.
प्रलयकाल सब नाशन हारी । तुम गौरी शिवशंकर प्यारी ॥
८.
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें । ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें ॥
९.
रूप सरस्वती को तुम धारा । दे सुबुद्धि ऋषि-मुनिन उबारा ॥
१०.
धरा रूप नरसिंह को अम्बा । प्रगट भईं फाड़कर खम्बा ॥
११.
रक्षा कर प्रह्लाद बचायो । हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो ॥
१२.
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं । श्री नारायण अंग समाहीं ॥
१३.
क्षीरसिन्धु में करत विलासा । दयासिन्धु दीजै मन आसा ॥
१४.
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी । महिमा अमित न जात बखानी ॥
१५.
मातंगी अरु धूमावति माता । भुवनेश्वरी बगला सुख दाता ॥
१६.
श्री भैरव तारा जग तारिणी । छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी ॥
१७.
केहरि वाहन सोह भवानी । लांगुर वीर चलत अगवानी ॥
१८.
कर में खप्पर-खड्ग विराजै । जाको देख काल डर भाजे ॥
१९.
सोहै अस्त्र और त्रिशूला । जाते उठत शत्रु हिय शूला ॥
२०.
नगर कोटि में तुम्हीं विराजत । तिहुंलोक में डंका बाजत ॥
२१.
शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे । रक्तबीज शंखन संहारे ॥
२२.
महिषासुर नृप अति अभिमानी । जेहि अघ भार मही अकुलानी ॥
२३.
रूप कराल कालिका धारा । सेन सहित तुम तिहि संहारा ॥
२४.
परी गाढ़ सन्तन पर जब-जब । भई सहाय मातु तुम तब तब ॥
२५.
अमरपुरी अरु बासव लोका । तब महिमा सब रहें अशोका ॥
२६.
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी । तुम्हें सदा पूजें नर-नारी ॥
२७.
प्रेम भक्ति से जो यश गावै । दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें ॥
२८.
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई । जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई ॥
२९.
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी । योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी ॥
३०.
शंकर आचारज तप कीनो । काम अरु क्रोध जीति सब लीनो ॥
३१.
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को । काहु काल नहिं सुमिरो तुमको ॥
३२.
शक्ति रूप को मरम न पायो । शक्ति गई तब मन पछितायो ॥
३३.
शरणागत हुई कीर्ति बखानी । जय जय जय जगदम्ब भवानी ॥
३४.
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा । दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा ॥
३५.
मोको मातु कष्ट अति घेरो । तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो ॥
३६.
आशा तृष्णा निपट सतावे । मोह मदादिक सब विनशावै ॥
३७.
शत्रु नाश कीजै महारानी । सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी ॥
३८.
करो कृपा हे मातु दयाला । ऋद्धि-सिद्धि दे करहु निहाला ॥
३९.
जब लगि जियउं दया फल पाऊं । तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
४०.
दुर्गा चालीसा जो नित गावै । सब सुख भोग परमपद पावै ॥
॥ दोहा ॥
श्री दुर्गा चालीसा जो कोई पढ़ै ।
सकल मनोरथ सिद्ध होय, जय जय जय अम्बे प्रसन्न होय ॥
श्री दुर्गा कवच | Durga Kavach
॥ श्री दुर्गा कवचम् ॥
Protective armor from Devi Mahatmya, Chapter 11
ॐ अस्य श्री दुर्गा कवचस्य ब्रह्मा ऋषिः,
अनुष्टुप् छन्दः, श्री महाकाली देवता,
ह्रीं बीजम्, श्री शक्तिः, क्रौं कीलकम्,
सप्तशती पाठे विनियोगः॥
ॐ नमश्चण्डिकायै॥
मार्कण्डेय उवाच॥
यत्तत् कवचं दुर्गाया विश्वामित्रेण धीमता।
पुराकल्पे प्रणीतं तत्साम्प्रतं श्रूयतां मुने॥१॥
अथ कवचम्॥
ब्रह्मोवाच॥
ब्रह्मा उवाच –
प्रथमं शैलपुत्रीति द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
तृतीयं चन्द्रघण्टेति कूष्माण्डेति चतुर्थकम्॥१॥
पञ्चमं स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।
सप्तमं कालरात्रीति महागौरीति चाष्टमम्॥२॥
नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।
उक्तान्येतानि नामानि ब्रह्मणैव महात्मना॥३॥
पूर्वपश्चिमयोः कवचम्॥
अग्निना दग्धवक्त्रा च रक्षेन्मां शैलपुत्रिका।
वाराही रक्षताद् वामं दक्षिणं वैष्णवी तथा॥४॥
स्कन्दमाता पृष्ठतो मां रक्षेन्नारायणी तथा।
ऊर्ध्वं ब्रह्माणी मां रक्षेदधस्ताद् वैष्णवी तथा॥५॥
वाराही रक्षति सदा पूर्वस्मिन् पार्श्वके तथा।
दक्षिणे चण्डिका रक्षेन्नैर्ऋत्यां खड्गधारिणी॥६॥
प्रतीच्यां वारुणी रक्षेद् वायव्यां मृगवाहिनी।
सोमस्य पत्नी चोदीच्यामैशान्यां शूलधारिणी॥७॥
ब्रह्माणी च तथा रक्षेत् सर्वतः परमेश्वरी।
इदं तु कवचं दिव्यं दुर्गायाः परमाद्भुतम्॥८॥
यः पठेत् प्रातरुत्थाय तस्य नश्यन्त्युपद्रवाः।
अग्निचौरारिवातेभवह्निसंसारसागरे॥९॥
स्थित्वा स्थिरो नरो यस्तु कवचं सततं पठेत्।
सर्वत्र विजयी स स्यादवश्यं नात्र संशयः॥१०॥
अनेन कवचेनाथ दुर्गामभ्यर्च्य भक्तितः।
कृतवान् विजयं युद्धे महिषासुरघातिनी॥११॥
दुर्गायाः कवचं पुण्यं यः पठेत् सततं नरः।
न तस्य जायते पीडा न चौराद्भयमण्वपि॥१२॥
॥ फलश्रुति ॥
इदं कवचमज्ञात्वा दुर्गापूजां करोति यः।
न तस्य जायते सिद्धिर्नवरात्रौ विशेषतः॥
Without knowing this Kavach, even if one worships Durga, they don't attain complete benefits, especially during Navratri.
श्री शैलपुत्री स्तुति | Shailputri Stuti
॥ श्री शैलपुत्री स्तुति ॥
Hymns in praise of Maa Shailputri - Navratri Day 1
॥ स्तुति ॥
प्रथमं त्वं महादेवि शैलपुत्रीति विश्रुता ।
धनं धान्यं सुखं शान्तिं देहि देवि नमोऽस्तु ते ॥१॥
O great Goddess, you are known as Shailputri, the first form. Grant me wealth, grains, happiness and peace. O Goddess, salutations to you.
त्रिलोकजननी देवि त्रिनेत्रे चन्द्रशेखरे ।
सौभाग्यं देहि मे नित्यं शैलपुत्री नमोऽस्तु ते ॥२॥
Mother of three worlds, three-eyed one, adorned with crescent moon, grant me eternal prosperity. O Shailputri, salutations to you.
शूलं कमलहस्ते च वृषारूढे च या स्थिता ।
सर्वं मंगलदा देवी शैलपुत्री नमोऽस्तु ते ॥३॥
You hold trident and lotus, seated on the bull. Bestower of all auspiciousness, O Goddess Shailputri, salutations to you.
चन्द्रार्धशेखरे देवि वृषारूढे च या स्थिता ।
रोगशोकहरा देवी शैलपुत्री नमोऽस्तु ते ॥४॥
O Goddess with crescent moon, seated on the bull, remover of diseases and sorrows, O Shailputri, salutations to you.
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥५॥
The Goddess who resides in all beings as Shailputri, salutations to her, salutations to her, salutations to her, again and again.
॥ फलश्रुति ॥
इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु प्रातःकाले समाहितः।
तस्य नश्यन्ति पापानि मूलाधार प्रबोधनम्॥
One who recites this stuti in the morning with concentration, their sins are destroyed and Muladhara chakra is awakened.
श्री कूष्माण्डा कवच | Kushmanda Kavach
॥ श्री कूष्माण्डा कवच ॥
Protective Armor of Goddess Kushmanda
॥ अथ कूष्माण्डा कवचम् ॥
ॐ कूष्माण्डायै नमः शिरः पातु मे सदा ।
अनाहते स्थिता देवी पातु मम ललाटकम् ॥१॥
Salutations to Kushmanda; may she protect my head always. The Goddess residing in Anahata protects my forehead.
ह्रीं कारः पातु नेत्रे मे सूर्यमण्डलवासिनी ।
अष्टभुजा महादेवी पातु मम भ्रुवोर्मध्ये ॥२॥
क्लीं कारः पातु कर्णौ मे ब्रह्माण्डसृष्टिकारिणी ।
कमण्डलुधरा देवी पातु मम नासिकाम् ॥३॥
ॐ ह्रीं कूष्माण्डायै कण्ठं पातु सदा मम ।
चक्रशूलधारिणी पातु मम भुजौ ॥४॥
चिन्मयी परमेशानी पातु मम हृदयम् ।
सूर्यलोकाधिपा देवी पातु मम उदरम् ॥५॥
कूष्माण्डा भगवती पातु मम नाभिम् ।
वरदाभयहस्ता च पातु मम कटिदेशम् ॥६॥
जपाकुसुमसंकाशा पातु मम जानुनी ।
सर्वरोगहरा देवी पातु मम पादौ ॥७॥
सर्वाङ्गं सर्वदा पातु कूष्माण्डा परमेश्वरी ।
अनाहताधारदेवी पातु मां सर्वतः सदा ॥८॥
May Kushmanda Parameshwari protect all my limbs always. The Goddess who is the foundation of Anahata chakra always protects me from all directions.
ब्रह्माण्डस्य कर्त्री च हर्त्री च पातु माम् ।
सृष्टिस्थितिविनाशानां अधिपा पातु सर्वदा ॥९॥
॥ फलश्रुति ॥
इदं कवचं पठित्वा तु कूष्माण्डायाः प्रभावतः।
अनाहतं प्रबुध्यते रोगाः नश्यन्ति सर्वदा॥
आयुरारोग्यसौभाग्यं पुत्रपौत्रधनागमः।
सूर्यलोकमवाप्नोति अन्ते मोक्षं च विन्दति॥
By reciting this Kavach with the power of Kushmanda, the Anahata chakra awakens and all diseases vanish. Long life, health, prosperity, children, grandchildren and wealth arrive. One attains the solar sphere and finally obtains liberation.
श्री कूष्माण्डा स्तुति | Kushmanda Stuti
॥ श्री कूष्माण्डा स्तुति ॥
Hymns in praise of Maa Kushmanda - Navratri Day 4
॥ स्तुति ॥
चतुर्थं त्वं महादेवि कूष्माण्डेति विश्रुता ।
अष्टभुजा महातेजा देहि मे सुखसम्पदम् ॥१॥
O great Goddess, you are renowned as Kushmanda, the fourth form. Eight-armed, with great splendor, grant me happiness and prosperity.
सूर्यमण्डलमध्यस्थां परमामृतवर्षिणीम् ।
चिन्मयीं प्रकृतिं साक्षात् कूष्माण्डां प्रणमाम्यहम् ॥२॥
She who resides in the solar sphere, showering supreme nectar, embodiment of consciousness, the very Primordial Nature - I bow to that Kushmanda.
कलशं चापं बाणं च चक्रं शूलं गदां तथा ।
कमण्डलुं वराभीतिं दधतीं प्रणमाम्यहम् ॥३॥
She who holds the pot, bow, arrow, discus, trident, mace, water pot, and boon-granting and fear-dispelling gestures - I bow to her.
अनाहते स्थितां नित्यं सहस्रारे स्थितां तथा ।
कूष्माण्डां कमलाक्षीं तां कूष्माण्डां प्रणमाम्यहम् ॥४॥
सूर्यज्योतिर्मयीं देवीं सूर्यभामां सुरेश्वरीम् ।
सूर्यप्रियां जगद्धात्रीं कूष्माण्डां प्रणमाम्यहम् ॥५॥
या देवी सर्वभूतेषु कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता ।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः ॥६॥
The Goddess who resides in all beings as Kushmanda, salutations to her, salutations to her, salutations to her, again and again.
ब्रह्माण्डं येन सृष्टं त्वं स्थितं येन धार्यते ।
कूष्माण्डे त्वं जगन्मातः महाविद्या नमोऽस्तु ते ॥७॥
अष्टभुजे महादेवि अनाहतनिवासिनि ।
सूर्यमण्डलसंस्थाने देहि भक्तिं नमोऽस्तु ते ॥८॥
॥ फलश्रुति ॥
इदं स्तोत्रं पठेद्यस्तु प्रातःकाले समाहितः।
अनाहतं प्रबुध्यते रोगशोकविनशनम्॥
ब्रह्माण्डस्य प्रसादेन सूर्यलोके महीयते॥
One who recites this Stuti in the morning with concentration, their Anahata chakra awakens and diseases and sorrows are destroyed. By the grace of the Creator of the universe, one is glorified in the solar sphere.
दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली | 108 Names of Durga
॥ दुर्गा अष्टोत्तर शतनामावली ॥
108 Sacred Names of Goddess Durga
॥ नामावली पाठ विधि ॥
• Take a flower and chant each name with "Om" before and "Namah" after
• Offer one flower at Devi's feet after each name
• Best recited during Navratri or on Ashtami
• Removes all obstacles and bestows divine grace
श्री दुर्गा आरती | Durga Aarti - Jai Ambe Gauri
॥ श्री दुर्गा आरती ॥
जय अम्बे गौरी - Most Popular Aarti of Goddess Durga
॥ आरती ॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को। उज्ज्वल से दोउ नैना, चंद्रवदन नीको॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै। रक्तपुष्प गल माला, कंठन पर साजै॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्पर धारी। सुर-नर-मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती। कोटिक चंद्र दिवाकर, सम राजत ज्योती॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
शुंभ-निशुंभ बिदारे, महिषासुर घाती। धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मदमाती॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे। मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
ब्रह्माणी, रूद्राणी, तुम कमला रानी। आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरों। बाजत ताल मृदंगा, अरू बाजत डमरू॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता। भक्तन की दुख हरता, सुख संपति करता॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
भुजा चार अति शोभित, खडग खप्पर धारी। मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती। श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योती॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
श्री अंबेजी की आरति, जो कोइ नर गावे। कहत शिवानंद स्वामी, सुख-संपति पावे॥ ॐ जय अम्बे गौरी..॥
॥ आरती के बाद ॥
मैया की आरती जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, मनवांछित फल पावै॥
या देवी सर्वभूतेषु | Ya Devi Sarva Bhuteshu
॥ या देवी सर्वभूतेषु ॥
The Most Powerful Hymn from Devi Mahatmyam
या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१॥
The Goddess who resides in all beings as Power, salutations to her, salutations to her, salutations to her again and again.
या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥२॥
The Goddess who resides in all beings as Lakshmi (Wealth), salutations to her...
या देवी सर्वभूतेषु कीर्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥३॥
या देवी सर्वभूतेषु बुद्धिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥४॥
या देवी सर्वभूतेषु लज्जारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥५॥
या देवी सर्वभूतेषु शान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥६॥
या देवी सर्वभूतेषु श्रद्धारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥७॥
या देवी सर्वभूतेषु कान्तिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥८॥
या देवी सर्वभूतेषु तुष्टिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥९॥
या देवी सर्वभूतेषु धृतिरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१०॥
या देवी सर्वभूतेषु दयारूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥११॥
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥१२॥
The Goddess who resides in all beings as Mother, salutations to her, salutations to her, salutations to her again and again.
दुर्गा सूक्तम् | Durga Suktam
॥ दुर्गा सूक्तम् ॥
From Rigveda - Hymn to Goddess Durga
जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो निदहाति वेदः।
स नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥१॥
तामग्निवर्णां तपसा ज्वलन्तीं वैरोचनीं कर्मफलेषु जुष्टाम्।
दुर्गां देवीं शरणमहं प्रपद्ये सुतरसि तरसे नमः॥२॥
दुर्गे दुर्गे रक्षिणि त्वां ध्रुवं हि स्मरामि।
अग्ने त्वां देवीं दुर्गां देवीं शरण्यामहं प्रपद्ये॥३॥
अग्ने त्वं दुर्गे देवि विश्वाभिर्धीभिरभिदेवीभिः।
सा नः पर्षदति दुर्गाणि विश्वा नावेव सिन्धुं दुरितात्यग्निः॥४॥
इन्द्रं दुर्गा देवीमिन्द्रं वै दुर्गां देवीम्।
इन्द्रो दुर्गे देवि नमो दुर्गायै देव्यै नमो नमः॥५॥
दुर्गायै देव्यै नमः।
दुर्गे देवि रक्षिणि नमः॥६॥
॥ फलश्रुति ॥
य इदं दुर्गासूक्तं पठेत्तस्य सर्वाणि दुर्गाणि तरति।
सर्वे पापक्षयो भवति। सर्वे कामाः समृध्यन्ति।
न तस्य रोगो न शोको न दारिद्र्यं न चौरभयं न शत्रुभयम्॥
One who recites this Durga Suktam crosses all difficulties. All sins are destroyed. All desires are fulfilled. They have no disease, no sorrow, no poverty, no fear from thieves, no fear from enemies.
नवदुर्गा स्तोत्रम् | Navadurga Stotram
॥ नवदुर्गा स्तोत्रम् ॥
Hymn to the Nine Forms of Goddess Durga
॥ प्रथम दुर्गा - शैलपुत्री ॥
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
॥ द्वितीय दुर्गा - ब्रह्मचारिणी ॥
दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
॥ तृतीय दुर्गा - चन्द्रघण्टा ॥
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
॥ चतुर्थ दुर्गा - कूष्माण्डा ॥
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
॥ पञ्चम दुर्गा - स्कन्दमाता ॥
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
॥ षष्ठ दुर्गा - कात्यायनी ॥
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
॥ सप्तम दुर्गा - कालरात्रि ॥
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धन्मूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
॥ अष्टम दुर्गा - महागौरी ॥
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
॥ नवम दुर्गा - सिद्धिदात्री ॥
सिद्धगन्धर्वयक्षाघैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात्सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
॥ फलश्रुति ॥
एतद् दुर्गाष्टकं नित्यं यः पठेत् प्रातरुत्थितः।
सर्वान् कामानवाप्नोति स्वर्गं चान्ते व्रजेन्नरः॥
One who recites this Navadurga Stotram daily in the morning attains all desires and finally reaches heaven.
Maa Kushmanda
कूष्माण्डा · Creator of the Universe
Maa Kushmanda is the fourth manifestation of Goddess Durga, worshipped on Navratri Day 4. She is the supreme creator who brought the universe into existence with her divine smile ("Ku" = little, "Ushma" = warmth/energy, "Anda" = cosmic egg). She resides in the core of the Sun (Surya) and provides direction and energy to the Sun God. She has eight arms holding weapons, rosary, lotus, disc, conch, bow, arrow, and a pot of nectar. She rides a lion and is the embodiment of the Anahata Chakra (heart chakra).
Surya Core Residence
Source of solar energy
Creator Smile
Universe from her smile
Anahata Chakra
Heart energy center
Sacred Mantras & Prayers
॥ मूल मंत्र ॥
Om Devi Kushmandayai Namah
॥ प्रार्थना मंत्र ॥
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे ॥
Surāsampūrṇakalaśaṃ rudhirāplutameva ca ।
Dadhānā hastapadmābhyāṃ kūṣmāṇḍā śubhadāstu me ॥
॥ ध्यान मंत्र ॥
रक्ताम्बरधरा रक्तपुष्पप्रिया रक्तगन्धानुलेपना ॥
सूर्यमण्डलमध्यस्था सूर्यदेवी जगत्प्रसूः ।
सर्वरोगहरा देवी सर्वसौभाग्यदायिनी ॥
Story & Spiritual Significance
Creation Story: When the universe was dark and void, Maa Kushmanda smiled and created the cosmos from her divine energy. She is the source of all creation and resides in the core of the Sun, giving light and direction to Surya Dev himself.
Solar Energy: She is the provider of direction, energy and heat to the Sun. Worshipping her removes darkness (ignorance) and brings light (knowledge), vitality and positive aura.
Anahata Chakra: She governs the heart chakra, awakening unconditional love, compassion, healing energy and emotional balance.
Ruling Planet: Sun (Surya). Her worship removes Surya dosha, improves health (especially eyes and heart), fame, leadership, confidence and overall vitality.
Sacred Offerings (Prasad)
Red Flowers
Jaggery / Honey
Red Sandalwood
Fruits
Offer bright red items symbolizing solar energy